यह तस्वीर 2 दिन पहले जालंधर में रेमडेसिविर की कालाबाजारी पकड़े जाने पर डॉक्टर से पूछताछ करते सेहत अफसरों की है।
गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर अफसर जाग गए हैं। कुछ दिन पहले बैंक एनक्लेव से राजस्थान सरकार की सप्लाई वाले इंजेक्शन पकडे गए थे। जिन्हें 2700 रेट की जगह 5 हजार में बेचा जा रहा था। अब प्रशासन ने इसकी पूरी सप्लाई चेन को कंट्रोल करने के लिए टीम गठित कर दी है। जिसकी अगुवाई जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी (ड्रग) लखवंत सिंह को सौंपी गई है।
प्रशासनिक अफसरों की टीम, पुलिस नहीं
जिला मजिस्ट्रेट घनश्याम थोरी की बनाई टीम को हेड जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी लखवंत सिंह करेंगे। उनके साथ नायब तहसीलदार विजय कुमार, पेशी ब्रांच के जूनियर क्लर्क हरमिंदर सिंह और ब्लॉक मिशन मैनेजर सूरज कलेर सहयोग देंगे। इस टीम में पुलिस को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि अफसरों का तर्क है कि जहां भी कार्रवाई की जरूरत होगी तो वहां संबंधित थाने की पुलिस को बुला लिया जाएगा।
MGK मेडिकल सेंटर से मिले थे 2 भरे और 12 खाली इंजेक्शन
जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की चर्चा काफी समय से है लेकिन यह पुख्ता तब हुई जब बैंक एनक्लेव के एक क्लीनिक में रेड हुई। यहां सेहत टीम को 2 भरे हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन दिए गए, जो राजस्थान सरकार की सप्लाई वाले थे। जब क्लीनिक की जांच हुई तो इस इंजेक्शन की 12 खाली वॉयल भी मिली थी। हालांकि यह इंजेक्शन किसे लगाए गए, इसके बारे में वहां कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया। जिसके बाद पुलिस ने MGK मेडिकल सेंटर के संचालक डॉ. गुरप्रीत सिंह और उनके असिस्टेंट रमन को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया था।
DC बोले- कालाबाजारी भी रोकेगी टीम
DC घनश्याम थोरी ने कहा कि यह टीम रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड व सप्लाई पर नजर रखेगी। इसके अलावा अगर कोई तय रेट से ज्यादा कीमत पर इसकी बिक्री करता है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में पुलिस कमिश्नर और SSP को पत्र भेजकर सूचित किया जा चुका है।

