मंगोलिया के राष्ट्रपति चार दिन के भारत दौरे पर हैं. मंगलवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई. इस दौरान 10 समझौतों का ऐलान किया गया. मंगोलिया ने भारत को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में परमानेंट मेंबरशिप पर समर्थन दोहराया. तो वहीं, भारत अब मंगोलिया की आर्मी को ट्रेनिंग देगा, ज्वाइंट मिलिटरी एक्सरसाइज करेगा, इतना ही नहीं-हथियार देने की भी बात हुई. एग्रीकल्चर में मंगोलिया का भारत के साथ काफी लंबा रिश्ता रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि भारत मंगोलिया में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा? क्या इसका कोई चीन कनेक्शन है? डाक टिकट पर रामलीला वाली कहानी क्या है?
भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर कई समारोह हो रहे हैं. इसी में प्रधानमंत्री मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना शामिल हुए. दोनों ने एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया. इस पर दोनों देशों की समृद्ध लोक नृत्य परंपराओं को दर्शाया गया है. भारत की पारंपरिक लोक रंगमंच शैली रामलीला और मंगोलिया का विशिष्ट लोक नृत्य बियेलगे इसमें चित्रित हैं. यह संयुक्त डाक टिकट भारत और मंगोलिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और साझा विरासत का प्रतीक है और दोनों देशों की सदियों पुरानी मित्रता और आत्मीयता को दिखाता है.
मंगोलिया के राष्ट्रपति भारत दौरे पर, नरेंद्र मोदी से मुलाकात में 10 समझौते हुए. संयुक्त डाक टिकट जारी, सैन्य और आर्थिक साझेदारी बढ़ी, चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति.
मंगोलिया के राष्ट्रपति चार दिन के भारत दौरे पर हैं. मंगलवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई. इस दौरान 10 समझौतों का ऐलान किया गया. मंगोलिया ने भारत को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में परमानेंट मेंबरशिप पर समर्थन दोहराया. तो वहीं, भारत अब मंगोलिया की आर्मी को ट्रेनिंग देगा, ज्वाइंट मिलिटरी एक्सरसाइज करेगा, इतना ही नहीं-हथियार देने की भी बात हुई. एग्रीकल्चर में मंगोलिया का भारत के साथ काफी लंबा रिश्ता रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि भारत मंगोलिया में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा? क्या इसका कोई चीन कनेक्शन है? डाक टिकट पर रामलीला वाली कहानी क्या है?
मंगोलिया में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा भारत? रामलीला का क्या कनेक्शन
पीएम मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना.
भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर कई समारोह हो रहे हैं. इसी में प्रधानमंत्री मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना शामिल हुए. दोनों ने एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया. इस पर दोनों देशों की समृद्ध लोक नृत्य परंपराओं को दर्शाया गया है. भारत की पारंपरिक लोक रंगमंच शैली रामलीला और मंगोलिया का विशिष्ट लोक नृत्य बियेलगे इसमें चित्रित हैं. यह संयुक्त डाक टिकट भारत और मंगोलिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और साझा विरासत का प्रतीक है और दोनों देशों की सदियों पुरानी मित्रता और आत्मीयता को दिखाता है.
लेकिन भारत की नजर क्यों, इसे 10 प्वाइंट में समझें
मंगोलिया चीन और रूस के बीच स्थित है और दोनों महाशक्तियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षा और संसाधनों का महत्वपूर्ण केंद्र है. भारत के मजबूत संबंध मंगोलिया के साथ चीन के एकतरफा प्रभुत्व को चुनौती देंगे. यह भारत को रणनीतिक बढ़त देगा और चीन को अपने प्रभाव क्षेत्र में संतुलन बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.
मंगोलिया की धरती के अंदर भारी तादात में कोयला, तांबा और दुर्लभ धातुएं हैं. भारत के लिए ये चीजें स्टील मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी टेक्नोलॉजी आदि के लिए जरूरी हैं. भारत ने मंगोलिया में कोयला और तांबा की खोज और खनन के लिए समझौते किए हैं ताकि चीन पर निर्भरता कम हो.
मंगोलिया के राष्ट्रपति चार दिन के भारत दौरे पर हैं. मंगलवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई. इस दौरान 10 समझौतों का ऐलान किया गया. मंगोलिया ने भारत को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में परमानेंट मेंबरशिप पर समर्थन दोहराया. तो वहीं, भारत अब मंगोलिया की आर्मी को ट्रेनिंग देगा, ज्वाइंट मिलिटरी एक्सरसाइज करेगा, इतना ही नहीं-हथियार देने की भी बात हुई. एग्रीकल्चर में मंगोलिया का भारत के साथ काफी लंबा रिश्ता रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि भारत मंगोलिया में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा? क्या इसका कोई चीन कनेक्शन है? डाक टिकट पर रामलीला वाली कहानी क्या है?
मंगोलिया में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा भारत? रामलीला का क्या कनेक्शन
पीएम मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना.
भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर कई समारोह हो रहे हैं. इसी में प्रधानमंत्री मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना शामिल हुए. दोनों ने एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया. इस पर दोनों देशों की समृद्ध लोक नृत्य परंपराओं को दर्शाया गया है. भारत की पारंपरिक लोक रंगमंच शैली रामलीला और मंगोलिया का विशिष्ट लोक नृत्य बियेलगे इसमें चित्रित हैं. यह संयुक्त डाक टिकट भारत और मंगोलिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और साझा विरासत का प्रतीक है और दोनों देशों की सदियों पुरानी मित्रता और आत्मीयता को दिखाता है.
लेकिन भारत की नजर क्यों, इसे समझें
मंगोलिया चीन और रूस के बीच स्थित है और दोनों महाशक्तियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षा और संसाधनों का महत्वपूर्ण केंद्र है. भारत के मजबूत संबंध मंगोलिया के साथ चीन के एकतरफा प्रभुत्व को चुनौती देंगे. यह भारत को रणनीतिक बढ़त देगा और चीन को अपने प्रभाव क्षेत्र में संतुलन बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.
मंगोलिया की धरती के अंदर भारी तादात में कोयला, तांबा और दुर्लभ धातुएं हैं. भारत के लिए ये चीजें स्टील मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी टेक्नोलॉजी आदि के लिए जरूरी हैं. भारत ने मंगोलिया में कोयला और तांबा की खोज और खनन के लिए समझौते किए हैं ताकि चीन पर निर्भरता कम हो.
मंगोलिया में भारत का 1.7 अरब डॉलर से ज्यादा का ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट है. इससे मंगोलिया को एनर्जी सिक्योरिटी मिलेगी और भारत की आर्थिक-पार्टनरशिप का दायरा बढ़ेगा. मंगोलिया में कोकिंग कोल का बहुत बड़ा रिजर्व है…इसको भारत में आयात करने का खर्चा क्या आएगा ये देखा जा रहा है.
मंगोलिया व्यापार मार्गों और परिवहन नेटवर्क में चीन पर कम निर्भरता चाहता है. मंगोलिया के संसाधन रूस या अन्य आउटलेट्स के माध्यम से भारत पहुंचना आसान हो सकते हैं, जिससे चीन की भूमिका कम होगी.
साइबर सुरक्षा, सीमा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की योजना है. ये पहल भारत को सीमा पार संभावित जोखिमों को समझने और उनसे निपटने में मदद करेगी. भारत और मंगोलिया के बीच मिलेट्री एक्सरसाइज हो रही हैं, जिससे दोनों सेनाओं के बीच संपर्क, प्रशिक्षण और रणनीतिक समझ बढ़ रही है.
भारत मंगोलिया के इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, एजुकेशन, डिजिटल पार्टनरशिप आदि में भारी इन्वेस्टमेंट कर रहा है. इससे जहां मंगोलिया का डेवलपमेंट होगा, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नए बाजार खुलेंगे.
भारत चाहता है कि वह एक बड़ी शक्ति के रूप में जो आजाद, खुला, समृद्ध और समावेशी इंडोपैसिफिक क्षेत्र चाहता है, उसमें महत्वपूर्ण भागीदार हो. मंगोलिया का स्थान चीन और रूस की सीमाओं के बीच ऐसा है कि भारत के रणनीतिक हितों के अनुरूप है.
भारत के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वह विश्व मंचों पर अपने नेटवर्क और साथी देशों की संख्या बढ़ाए. ऐसा करने से उसकी विदेश नीति और कूटनीति को मजबूती मिलेगी. मंगोलिया जैसे देश से गहरा संबंध इसका हिस्सा है.
मंगोलिया जैसे मध्य एशियाई देश के साथ अच्छे संबंध भारत की वैश्विक छवि को संतुलित और भरोसेमंद साझेदार के रूप में मजबूत करेंगे. यह भारत को ग्लोबल साउथ में और अधिक आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग के लिए भरोसेमंद विकल्प बनाएगा.
मंगोलिया पाकिस्तान के लिए सीधे सुरक्षा चुनौती नहीं है, लेकिन भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोण में रणनीतिक संतुलन पर असर पड़ेगा. भारत का क्षेत्रीय नेटवर्क मजबूत होने से पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्रों में दबाव बढ़ सकता है और उसकी कूटनीतिक चालों पर असर आएगा.

