अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच विवाद ने दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए उत्सुक थीं और उन्होंने केवल उनकी इच्छा पूरी करने के लिए तस्वीर खिंचवाई थी।
ट्रंप के इस बयान को इटली में अपमानजनक माना गया। जवाब में मेलोनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों को गलत और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इटली किसी से एहसान या मदद नहीं मांगता और सहयोगी देशों के नेताओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
मामला तब और गंभीर हो गया जब इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani ने विरोध स्वरूप अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने मियामी में होने वाले इटली-अमेरिका बिजनेस, इन्वेस्टमेंट और साइंस फोरम में शामिल होने से इनकार कर दिया तथा अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के साथ प्रस्तावित बैठक भी रद्द कर दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। ईरान, नाटो और यूरोपीय सुरक्षा नीति जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच पहले से मतभेद मौजूद थे। ट्रंप ने हाल ही में आरोप लगाया था कि होर्मुज संकट के दौरान मेलोनी ने नाटो सहयोगियों का पर्याप्त समर्थन नहीं किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच दूरी और बढ़ गई।
हालांकि अमेरिका और इटली लंबे समय से नाटो सहयोगी रहे हैं और सुरक्षा, व्यापार तथा विदेश नीति के कई क्षेत्रों में साथ काम करते हैं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने दोनों देशों के संबंधों में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। यदि यह बयानबाजी आगे भी जारी रहती है, तो द्विपक्षीय सहयोग पर इसका असर पड़ सकता है।

