ईरान की प्रसिद्ध गायिका और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर Parastoo Ahmadi एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। ईरानी अदालत ने उन्हें बिना हिजाब सार्वजनिक प्रस्तुति देने और कथित रूप से “अनैतिक सामग्री” प्रसारित करने के आरोप में 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर दो साल का विदेश यात्रा प्रतिबंध और दो साल तक किसी भी कलात्मक गतिविधि में भाग लेने पर रोक भी लगा दी गई है।
कौन हैं परस्तू अहमदी?
1997 में ईरान के नोशहर शहर में जन्मी परस्तू अहमदी लोक और पारंपरिक ईरानी संगीत की जानी-मानी कलाकार हैं। उन्होंने फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और कम उम्र से ही संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया था। 2022 के “महिला, जीवन और स्वतंत्रता” आंदोलन के दौरान उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
दिसंबर 2024 में परस्तू अहमदी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक विशेष ऑनलाइन कॉन्सर्ट का प्रसारण किया। इस प्रस्तुति में उन्होंने बिना हिजाब के देशभक्ति गीत “अज़ खूने जवाने वतन” गाया। यह वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचा और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया। ईरानी अधिकारियों ने इसे देश के धार्मिक और सामाजिक नियमों का उल्लंघन माना।
गिरफ्तारी से सजा तक
कॉन्सर्ट के कुछ दिनों बाद अहमदी और उनकी टीम के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया, लेकिन मामला अदालत तक पहुंच गया। हाल ही में अदालत ने अहमदी और उनकी टीम के अन्य सदस्यों को 74 कोड़ों की सजा, दो साल का यात्रा प्रतिबंध और कलात्मक गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना
मानवाधिकार संगठनों और कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों पर कठोर प्रतिबंध का उदाहरण है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने परस्तू अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।
क्यों चर्चा में है यह मामला?
परस्तू अहमदी का मामला केवल एक कलाकार की सजा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, हिजाब कानून और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े व्यापक विवाद के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

